गोरखपुर में बेस्ट चाइल्ड डॉक्टर

बच्चों के लिए स्वस्थ आहार क्या है ?

पहली बार माता-पिता बनने वाले बच्चों के लिए यह एक दुविधा होती है कि बच्चों को स्वस्थ आहार में क्या देना चाहिए । 6 महीनों के बाद अपने बच्चों को भोजन में क्या खिलाया जाए और कैसे खिलाया जाए इसका निर्णय लेना बहुत तनावपूर्ण और भ्रमित करनेवाला होता है। शुरुआती बालपन पोषण को लेकर ढ़ेर सारे विवाद हैं और शिशुओं के भोजन को अलग-अलग लोगों की अलग राय हैं। गोरखपुर में बेस्ट चाइल्ड डॉक्टर इसके लिए परामर्श देने हेतु मौजूद है । शिशु को कैसा आहार दें और कितनी मात्रा में दे, यह सब नीचे कुछ सामान्य संकेतों द्वारा बताया गया है । इनका उपयोग आप अपने शिशु का भोजन बनाने के लिए कर सकते है, जो केवल सुरक्षित ही नहीं बल्कि बेहद पोषण वाला भी हैं :

  • सबसे पहले स्तनपान
  • आपका शिशु ठोस भोजन पाने से पहले पूर्ण रूप से स्तनपान पर निर्भर होना चाहिए ताकि ठोस भोजन खाने से पहले वह सारे आवश्यक पोषक तत्व और स्वास्थ्य प्रदान करनेवाले तत्व पा सके । नौ महिने के लगभग अक्सर यह उलटा हो जाता है ।

  • आयरन की रखें पूरी खुराक
  • शिशु के शरीर के अंदर 6 महीने के दौरान आयरन की मात्रा कम हो सकती है । स्वस्थ विकास के लिए आयरन की अच्छी आपूर्ति आवश्यक है । अधिकांश बेबी मिनरल्स में आयरन होता है इसलिए आप यह ध्यान रखें कि आप जो ले रहे हैं वह ठीक हो । आपके शिशु के लिए भोजन जिसमें आयरन की प्रचुर मात्रा हो उन्हें अपने बच्चे के भोजन में शामिल करने के बारे में अपने डॉक्टर से बात करें।

    गोरखपुर में बाल चिकित्सक

  • फलों का जूस
  • आमतौर पर माता-पिता बच्चों को फलों का रस देते हैं ताकि उनके शरीर में विटामिन - सी की आपूर्ति को पूरा किया जा सके । हालांकि दूध, फलों का रस और पानी एक साल से कम आयु वाले शिशुओं के लिए यह तीन महत्वपूर्ण द्रव पदार्थ् हैं, फिर भी पानी ज्यादा आवश्यक हैं । हालांकि फलों के रस की कुछ मात्रा सुरक्षित है । ज्यादा मात्रा में जूस पेट से जुड़ी समस्याओं का कारण हो सकता है, जैसे - पतला मल, आपके बच्चे की भूख और गंभीर मामलों में उनके शारीरिक विकास पर प्रभाव डाल सकता हैं। शिशुओं के आहार-संबंधी सुझाव :

    शिशु को दुधारू पशुओं से प्राप्त आहार, दूध और दूध से बने पदार्थ जैसे पनीर, दही आदि प्रदान करना लाभदायक होता है। इसके साथ ही इस आयु-अवधि के दौरान बच्चों को ताजे फल, फलों का रस, दाल, दाल का पानी, हरी पत्तेदार सब्जियां और दलिया आदि देने से उनकी पोषक संबंधी जरूरतें पूरी होती हैं। गोरखपुर में बाल चिकित्सक उत्तम इलाज के साथ उत्तम परामर्श भी समय-समय पर देते ही रहते हैं ।

    जब बच्चे एक साल के हो जाते हैं तो वह बाल्यावस्था में प्रवेश में करते है। यह वह अवस्था है जब बच्चे अत्यंत क्रियाशील होते हैं। इस अवस्था में बच्चें स्वयं भोजन करना सीख जाते हैं और वह अपने भोजन में स्वयं रूचि लेना भी शुरू कर देते हैं। बाल्यावस्था में शारीरिक वृद्धि के साथ-साथ मस्तिष्क का विकास और किसी भी संक्रमण से लड़ने का महत्वपूर्ण समय होता है। इसलिए यह बहुत आवश्यक हो जाता है कि बच्चों को ऊर्जा, प्रोटीन, विटामिन और खनिजों से युक्त आहार मिले।

    डॉक्टर कहते हैं कि 1 से 3 साल के बच्चों के आहार में 75 ग्राम अनाज, 25 ग्राम फलियां, 100 ग्राम सब्जियां, 75 ग्राम फल, 400 मि.ली दूध, 25 ग्राम फैट आदि होना चहिए और 4 से 6 साल के बच्चों के लिए 120 ग्राम अनाज, 45 ग्राम फलियां, 100 ग्राम सब्जियां, 75 ग्राम फल, 400 मिली दूध और 25 ग्राम फैट होना चहिए ।

    गोरखपुर में चाइल्ड हेल्थ केयर

    गोरखपुर में चाइल्ड हेल्थकेयर केयर हेतु शिशुओं के पोषण और आहार का पूरा चार्ट माता-पिता को दिया जाता है । बच्चों में सर्वोत्तम विकास और उनकी इम्यूनिट को बढ़ाने के लिए उचित तरीके से बनाया गया संतुलित आहार परम आवश्यक है। इस अवधि के दौरान शरीर में हड्डियों का विकास होता है, इसलिए कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थ जैसे कि दुग्ध उत्पाद (दूध, पनीर, दही) पालक और ब्रोकली का सेवन करना बेहद जरूरी हैं, क्योंकि इन पदार्थों में कैल्शियम भरपूर मात्रा में होता हैं। बच्चों में कैलोरी की जरूरतों को पूरा करने के लिए अधिक मात्रा में कार्बोहाइड्रेट और फैट की आवश्यकता होती है। इसलिए, उनके खाद्य पदार्थों में साबुत अनाज जैसे गेहूं, ब्राउन राइस, मेवा, वनस्पति तेल शामिल करना चहिए और फल एवं सब्जियों में केला एवं आलू, शकरकंद का रोज़ाना सेवन करना चाहिए ।

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