शिशु देखभाल

नवजात कि देखभाल

पहली बार माता-पिता बनना धीरे-धीरे ही सही मगर आपको बहुत कुछ सीखा देता है । यहाँ कुछ बुनियादी चीजें बताई गई हैं जो एक माता-पिता को दैनिक रोज़-मर्रा के जीवन में शिशु हेतु ध्यान रखने की आवश्यकता है। गोरखपुर में बेस्ट चाइल्ड डॉक्टर अब उपलब्ध है ।

  • हाथों को धोकर स्वच्छ रखें :
  • नवजात को संभालने से पहले अपने हाथों को अवश्य धोएँ या कम से कम सैनिटाइज़र का उपयोग करें। एक नवजात शिशु की इम्यूनिटी मजबूत नहीं होती है, इसलिए संक्रमण होने की पूरी संभावना बनी रहती है। इसके अलावा, अन्य लोगों के मामले में जो बच्चे को संभाल रहे हैं, सुनिश्चित करें कि उनके हाथ साफ हों।

  • नवजात को हाथों का सहारा दें :
  • नवजात शिशु को उठाने में गर्दन की मांसपेशियों का विकास नहीं होता है। यही वजह है कि शिशुओं को पकड़ते समय उनकी गर्दन को सहारा दिया जाता है। यह नवजात को संभालने का एक सुरक्षित तरीका है।

  • नवजात को ज़ोर से न हिलाएँ :
  • खेलते समय नवजात को हिलाने से उसके मस्तिष्क में रक्तस्राव हो सकता है जो संकट पैदा कर सकता है। नवजात को यदि जगाना भी हो, तो पैरों में हल्की गुदगुदी से ही वह जाग जाएगा।

  • आउटडोर या दुर्गम खेल न करें :
  • नवजात की देखभाल के लिए यह भी बहुत आवश्यक कि शिशु का शरीर किसी भी तरह के कठिन या मुश्किल खेल हेतु अभी तैयार नहीं है । इसलिए, शिशु को घुटने के बल बैठाना या हवा में उछालना नहीं चाहिए ।

    शिशु देखभाल

  • डायपर बदलना :
  • माता-पिता पर यह निर्भर करता है कि वे कपड़े या डायपर में से किसका चुनाव करेंगे । नवजात शिशु एक दिन में कम से कम 10 बार पैड गंदा कर देगा । यदि डायपर का उपयोग किया जा रहा है, तो उन चीजों की एक सूची है जिन्हें संभाल कर रखा जाना चाहिए।

  • नवजात का स्नान :
  • माता-पिता बने नए लोगों के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है इसलिए माता-पिता के लिए इस प्रक्रिया को जानना महत्वपूर्ण है। नवजात को पानी में रखने से पहले, पानी का तापमान जांच लें क्योंकि गर्म पानी नवजात के शरीर में जलन या चकत्ते पैदा कर सकती है ।

  • टीकाकरण :
  • इस बात का विशेष तौर पर ध्यान रखें कि नवजात का टीकाकरण कब और कितनी बार करवाना है । उसके स्वास्थ्य और उसके विकास के लिए यह महत्वपूर्ण है । ऐसे कई टीकाकरण हैं जो शिशुओं को कई प्रकार के संक्रमणों से दूर रखने के लिए दिए जाते हैं।

  • भोजन और पोषण :
  • नवजात के पोषण में भोजन सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हालांकि नवजात शिशुओं की इम्यूनिटी मजबूत करने के लिए कम से कम 6 महीने तक स्तनपान कराने की सलाह दी जाती है । गोरखपुर में इसके लिए बाल चिकित्सक मौजूद हैं ।

    कामकाजी महिलाओं के लिए नवजात की देखभाल करना एक मुश्किल बात है लेकिन इतनी छोटी उम्र में बच्चे को किसी अनजाने हाथों में देना भी खतरनाक हो सकता है । ऐसे मामले में शिशु डे केयर या शिशु देखभाल केंद्र का विकल्प माता-पिता चुन सकते हैं लेकिन शिशु को किसी भी प्रकार के शिशु डे केयर में रजिस्टर्ड करने से पहले, उस शिशु केंद्र के विषय में सभी जानकारी प्राप्त कर लें । किसी भी प्रकार की समस्याओं से बचने के लिए एक प्रतिष्ठित और विश्वसनीय शिशु देखभाल केंद्र में जाना ही उत्तम होता है । गोरखपुर में चाइल्ड हेल्थकेयर अब उपलब्ध हो गए हैं ।

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